Ganesh Ji
Uttra Matrimonial
Laxmi Ji
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॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ॥ बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ॥ बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ॥ जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा ॥ अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी ॥ कुमति निवार सुमति के संगी ॥ जय बजरंगबली ॥ श्री हनुमान चालीसा ॥

शिवजी की आरती

 शिव आरती

ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥


त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥

॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥

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